BHAGVAT GEETA ADHYAY 8
आठवां अध्याय: "अक्षर ब्रह्म योग - अनंत आत्मा का दर्शन" भगवद गीता का आठवां अध्याय एक महत्वपूर्ण अध्याय है जो अक्षर ब्रह्म योग के प्रति भक्ति और ज्ञान की महत्वपूर्ण बातें बताता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अनंत आत्मा का दर्शन और अक्षर ब्रह्म के अर्थ की व्याख्या करते हैं। 1. अक्षर ब्रह्म का वर्णन: सबसे पहले, आठवां अध्याय में अक्षर ब्रह्म का वर्णन किया जाता है। अक्षर ब्रह्म एक अनंत, अविनाशी, और सर्वव्यापी आत्मा का प्रत्यावबोधन होता है, जो सभी जीवों के अंतर्गत है। 2. भगवान के स्वरूप का दर्शन: इस अध्याय में, भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन दिलाते हैं। वे अपने विराट रूप का दर्शन करवाते हैं, जिसमें वे सभी जीवों के साथ समर्पित हैं और सबकुछ उनके व्यापार में घटित हो रहा है। इस दर्शन से अर्जुन को भगवान के दिव्य स्वरूप की समझ होती है और वह उनके महत्वपूर्ण आदर्श को देखते हैं। 3. जीव और परमात्मा का संबंध: आठवां अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण जीव और परमात्मा के संबंध का विवेचन करते हैं। वे बताते हैं कि जीवात्मा और परमात्मा में कोई भिन्नता नहीं होता। जब जीव अ...