BHAGVAT GEETA ADHYAY 2
भगवद गीता का दूसरा अध्याय - "सांख्ययोग" भगवद गीता का दूसरा अध्याय, जिसे "सांख्ययोग" भी कहा जाता है, गीता के प्रमुख अध्यायों में से एक है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को विभिन्न मानव जीवन के पहलुओं के बारे में विस्तार से बताते हैं और आध्यात्मिक ज्ञान का महत्व प्रमोट करते हैं। यहां इस अध्याय के मुख्य बिंदुओं का विस्तार से वर्णन किया गया है: 1. सांख्ययोग का परिचय: दूसरे अध्याय का नाम "सांख्ययोग" है, जिसका अर्थ होता है "ज्ञान का योग"। इस योग में ज्ञान का महत्व और आध्यात्मिक जीवन के मार्ग पर चलने के उपायों का विवेचन किया जाता है। 2. सांख्य और योग: सांख्य योग गीता में ज्ञान के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताता है। यहां श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि वे आत्मा को शांति, निर्मलता, और मोक्ष की दिशा में जानने के लिए ज्ञान का अध्ययन करें। 3. आत्मा का अमर होना: इस अध्याय में अर्जुन को बताया जाता है कि आत्मा अमर होता है और शरीर केवल एक शारीरिक वाहन है। जब शरीर मर जाता है, तो आत्मा अविनाशी बनी रहती है। 4. आत्मा का नाश नहीं होता: श्रीकृष्ण य...