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BHAGVAT GEETA ADHYAY 12

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  12 वां अध्याय: "भक्ति का रहस्य और परम गति की प्राप्ति" गीता के बारहवें अध्याय में भक्ति का महत्व और भक्ति के रहस्य का विवेचन किया गया है। यह अध्याय भक्ति की महत्वपूर्ण बातें और भक्ति के माध्यम से परम गति की प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। 1. भक्ति का महत्व: इस अध्याय में, भगवान श्रीकृष्ण भक्ति के महत्व को प्रमोट करते हैं। वे कहते हैं कि भक्ति ही सबसे उत्तम और निःस्वार्थिक प्रेम का स्रोत है, और यह भक्ति ही वास्तविक आत्मा के साथ भगवान के संबंध का कीचड़ हटाने का माध्यम है। 2. भक्ति के रहस्य: बारहवें अध्याय में भगवान भक्ति के रहस्य का परिचय करते हैं। वे बताते हैं कि भक्ति का अर्थ है भगवान के प्रति निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण, और यह एक साधक को परम गति की ओर ले जाने का मार्ग है। 3. भक्ति के प्रकार: इस अध्याय में, भगवान भक्ति के विभिन्न प्रकार का वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि भक्ति की विभिन्न रूपें हो सकती हैं, जैसे कि साकार और निराकार भक्ति, और हर कोई अपने स्वभाव के अनुसार भगवान के प्रति प्रेम कर सकता है। 4. भक्ति के प्रसंग: इस अध्याय में भगवान भक्ति के प्रसंग का वर्ण...